Gold Price: शिखर पर सोना, क्या गहनों की बिक्री पर भी पड़ा है असर? – gold price record high impact on jewelry demand
Gold Price: सोने की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। इस साल यानी 2025 की पहली तिमाही में गोल्ड प्राइस में 18% से अधिक का उछाल आया है। यह 1986 के बाद किसी एक तिमाही में गोल्ड का सबसे शानदार प्रदर्शन है। देश की राजधानी दिल्ली में सोने का भाव 92,980 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब गोल्ड प्राइस रिकॉर्ड ऊंचाई पर है, तो क्या ग्राहक सोना खरीदेंगेय़ इतनी ऊंची कीमतों का मांग और बिक्री भी क्या असर पड़ेगा।भारत में सोने की अहमियतभारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। सोना यहां हमेशा सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा रहा है। खासकर, शादी-विवाह जैसे मौके सोने के जेवरात खरीदना सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, भारतीय महिलाओं के पास कुल मिलाकर करीब 24,000 टन सोना है। यह दुनिया के कुल स्वर्ण भंडार का तकरीबन 11% है।संबंधित खबरेंसोने का दाम बढ़ने से बिक्री पर असरजौहरियों का कहना है कि सोने के दाम बढ़ने से ग्राहकों की संख्या में थोड़ी कमी आई है। लेकिन गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर देशभर में करीब 800 किलो सोना बिका। यह पिछले साल की तुलना में थोड़ा ही कम है। हालांकि उपभोक्ता अब केवल जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर मांग में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आई है।गहनों की बिक्री सुस्त क्यों है?गोल्ड इंडस्ट्री के मुताबिक, इस वक्त कोई बड़ा त्योहार या शादी का सीजन नहीं है। ऐसे में गहनों की बिक्री नरम रहना स्वाभाविक बात है। बेशक, सोने के दाम में आई बेहिसाब तेजी भी डिमांड में सुस्ती की एक अहम वजह है, क्योंकि ग्राहक खरीदारी के लिए कीमतें स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं।क्या गहनों की बिक्री बढ़ेगी?अभी खरमास चल रहा है, जिसमें शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य की मनाही है। यह 14 अप्रैल को खत्म होगा और उसके बाद शादी-विवाह का सीजन शुरू होगा। गोल्ड इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि शादी का सीजन शुरू होने के बाद गहनों की बिक्री में तेजी देखने को मिलेगी। उस वक्त तक सोने की कीमतों के भी कुछ हद तक स्थिर हो जाने की भी उम्मीद है।क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें? रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद चीन और अन्य देशों ने बड़ी मात्रा में सोना खरीदा। इससे गोल्ड की डिमांड और कीमतों में उछाल आया। इजराइयल और गाजा में फिर से तनाव बढ़ा है। इसके चलते निवेशकों का सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव बढ़ा। अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बनी रहने से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला। डोनाल्ड ट्रंप की नए टैरिफ पर कई देश जवाबी एक्शन की बात कर रहे हैं। इससे भी आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी और गोल्ड में मजबूती आई है। यह भी पढ़ें : सोने की कीमतों में 1986 के बाद दिखी ऐसी तेजी, टूटा 39 साल पुराना रिकॉर्ड; जानें 10 बड़ी वजह