“अब भरोसा नहीं रहा”, ट्रंप की हरकतों से परेशान जर्मनी, अमेरिका से वापस ला सकती है अपना 1,200 टन सोना – trust is fading germany eyes its 1200 ton gold reserve exit from us vaults amid trump turmoil
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमिकयों से तंग आकर जर्मनी एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। जर्मनी की सरकार अमेरिका में रखे अपने 1,200 टन सोना को वापस लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। ब्रिटिश अखबार ‘द टेलीग्राफ’ ने जर्मनी के अखबार Bild के हवाले से यह जानकारी दी है। यह कदम ट्रंप के नए टैरिफ वार के बाद दुनिया भर में बढ़ते व्यापारिक तनाव को दिखाता है।रिपोर्ट में बताया गया है कि, जर्मनी ने कई दशकों से अपना करीब 1200 टन सोना, न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक की तिजोरियो में रखा हुआ है। इस सोने की अनुमानित वैल्यू इस समय लगभग 113 अरब डॉलर या लगभग 10 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। यह जर्मनी के कुल गोल्ड रिजर्व का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा है और अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय गोल्ड रिजर्व माना जाता है।ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही यूरोपीय यूनियन समेत दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया। यूरोपीय यूनियन पर 20 फीसदी का ऊंचा टैरिफ लगाया गया है। जर्मनी, यूरोपीय यूनियन का ही हिस्सा है। ट्रंप के टैरिफ ऐलानों की जर्मनी में तीखी प्रतिक्रया देखने को मिल रही है। जर्मनी की प्रमुख राजनीतिक पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) के कई प्रभावशाली नेता अब इस व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।संबंधित खबरेंCDU के सांसद और पूर्व मंत्री मार्को वांडरविट्ज़ ने Bild से बात करते हुए कहा, “बिलकुल, गोल्ड को वापस लाने का सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है।” वांडरविट्ज़ लंबे समय से ऐसी नीतियों की मांग करते रहे हैं, जिससे जर्मन अधिकारियों को अमेरिका में रखे इसे गोल्ड रिजर्व की सीधी जांच की इजाजत मिले या फिर इसे अमेरिका से वापस लाया जाए। मार्को वांडरविट्ज़ ने 2012 में भी अमेरिका में रखे गोल्ड रिजर्व के जांच की मांग की थी, लेकिन उनके अनुरोध को ठुकरा दिया गया था।वहीं, CDU के यूरोपीय संसद सदस्य मार्कस फेर्बर ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “मैं जर्मनी के गोल्ड रिज़र्व की नियमित जांच की मांग करता हूं। बुंडेसबैंक के आधिकारिक प्रतिनिधियों को स्वयं सोने की ईंटों की गिनती करनी चाहिए और उनकी रिपोर्ट बनानी चाहिए।”क्या जर्मनी का भरोसा अमेरिका से डगमगा रहा है?द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ‘ब्रेटन वुड्स सिस्टम’ के तहत ट्रेड सरप्लस को सोने में बदलने का सिस्टम आया था। इसी के बाद जर्मनी ने अमेरिका में सोना जमा करना शुरू किया था। उस समय ऐसा माना जाता था कि आर्थिक संकट की स्थिति में डॉलर की तत्काल उपलब्धता के लिए यह कदम समझदारी भरा है। लेकिन अब यह सोच बदली जा रही है। यूरोपियन टैक्सपेयर एसोसिएशन के सदस्य माइकल जेगर ने Bild से कहा, “जितना जल्दी हो सके, जर्मनी के सारे गोल्ड रिजर्व को फ्रैंकफर्ट या कम से कम यूरोप के भीतर लाया जाना चाहिए।”फिलहाल जर्मनी का लगभग 50 प्रतिशत सोना फ्रैंकफर्ट में ही रखा हुआ है, जबकि 13 प्रतिशत लंदन में रखा गया है। सोने को वापस लाने की यह मांग ऐसे समय में आई है जब जर्मनी अमेरिका पर अपनी निर्भरता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जर्मनी ने हाल ही में रक्षा पर अपन बजट बढ़ाया है। साथ ही सड़क, रेल और सार्वजनिक सेवाओं के लिए 500 अरब यूरो के फंड का ऐलान किया है।हालांकि, जर्मनी का सेंट्रल बैंक बुंडेसबैंक किसी भी तरह के अविश्वास से इनकार करता है। एक बयान में उन्होंने कहा, “हमें न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व पर हमारे गोल्ड रिजर्व की सुरक्षा को लेकर कोई संदेह नहीं है। वह हमारे लिए एक भरोसेमंद पार्टनर हैं।”यह भी पढ़ें- अगले हफ्ते ये 2 शेयर दिला सकते हैं शानदार मुनाफा, SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह से जानें टारगेट प्राइसडिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।