Amarnath Yatra 2025: अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, बैंक शाखाओं में कतारों में लगे श्रद्धालु, बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने से पहले जानें पूरी डिटेल – amarnath yatra 2025 registration starts know the complete details before going for the darshan of baba barfani
Amarnath Yatra 2025: पवित्र श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है, जो 3 जुलाई से 9 अगस्त तक चलेगी। जम्मू और कश्मीर में भगवान शिव को समर्पित अमरनाथ मंदिर 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह हिंदुओं के सबसे पुराने तीर्थ स्थलों में से एक है। अमरनाथ पर्वत पर स्थित शिवलिंग साल के अधिकांश समय बर्फ से ढका रहता है। उत्साही तीर्थयात्री जम्मू में बैंक शाखाओं के बाहर कतार में खड़े दिखाई दिए, जिन्हें उम्मीद है कि तीर्थस्थल पर जाने वाले पहले जत्थे का हिस्सा बनने का उन्हें अवसर मिलेगा।दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग और गंदेरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे छोटे लेकिन खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से शुरू होने वाली है। 38 दिवसीय यात्रा 9 अगस्त को रक्षा बंधन के त्योहार के साथ समाप्त होगी।बोर्ड के अनुसार, 13 वर्ष से कम या 75 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति और छह सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को तीर्थयात्रा के लिए पंजीकृत नहीं किया जाएगा। पंजाब नेशनल बैंक, रेहारी शाखा के एक अधिकारी ने कहा, “आज सुबह अग्रिम यात्रा रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया। इच्छुक श्रद्धालु (पुरुष और महिला दोनों), वार्षिक तीर्थयात्रा को लेकर अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए सुबह से पहुंचने लगे हैं।”संबंधित खबरेंउन्होंने कहा कि यात्रा करने के इच्छुक सभी तीर्थयात्रियों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। ले साल 5.12 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने अमरनाथ में दर्शन किए, जो पिछले 12 वर्षों में तीर्थयात्रियों की सबसे अधिक संख्या थी।कठुआ में भक्त हुआ परेशानमंगलवार को कठुआ में पहले ही दिन रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचे भक्तों को मायूसी हाथ लगी। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की कठुआ ब्रांच में रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण काउंटर नहीं खुल सके। इससे भक्तों में निराशा और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई।हीरानगर से आए विकास महाजन ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को बताया कि वे और उनके साथी सुबह जल्दी उठकर उत्साह के साथ रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे थे। उनका इरादा 3 जुलाई को पहले जत्थे के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन करने का था। लेकिन, बैंक मैनेजर ने बताया कि कंप्यूटर उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं हो सका। उन्होंने इसे निराशाजनक बताते हुए कहा कि श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने 14 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू होने की घोषणा की थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर व्यवस्था की कमी ने उनके उत्साह को ठेस पहुंचाई।इसी तरह, हीरानगर के सुमित शर्मा ने अपने साथियों के साथ रजिस्ट्रेशन कराने की योजना बनाई थी। उन्होंने बताया कि उनके समूह में जम्मू और अन्य जगहों से आए भक्त भी शामिल थे। सुमित ने कहा, “हम सुबह सात बजे से तैयार होकर आए थे। लेकिन, बैंक अधिकारियों से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। वे कह रहे हैं कि कंप्यूटर जम्मू भेज दिया गया है और ऊपर से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।”सुमित ने यह भी बताया कि उनके दिल्ली में रहने वाले कुछ दोस्तों ने वहां की बैंक शाखाओं से रजिस्ट्रेशन करा लिया है, लेकिन कठुआ में स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। श्रद्धालुओं ने बैंक अधिकारियों पर अस्पष्ट जानकारी देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि रजिस्ट्रेशन कब शुरू होगा। इस बारे में कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है। इससे लंबी दूरी तय करके आए श्रद्धालुओं का उत्साह कम हो गया।स्थानीय लोगों ने प्रशासन और श्राइन बोर्ड से बेहतर समन्वय की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानियां न हों। हालांकि, श्रद्धालुओं ने उम्मीद जताई कि जल्द ही व्यवस्था सुधरेगी और वे बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अनुसार, इस साल यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी और 9 अगस्त तक चलेगी। रजिस्ट्रेशन के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (सीएचसी) और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। बोर्ड ने देशभर में 533 बैंक शाखाओं को रजिस्ट्रेशन के लिए अधिकृत किया है।अमरनाथ मंदिर का इतिहासहिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, अमरनाथ नाम उस स्थान से लिया गया है जहां भगवान शिव ने अपनी पत्नी देवी पार्वती को अमरता (अमरत्व) का रहस्य बताया था। यहां अमर कथा सुनाई गई थी, इसलिए गुफा को अमरनाथ कहा जाने लगा। अमरेश और अमरेश्वर इस स्थान से जुड़े अन्य नाम हैं। अमर कथा सभी को सुनने के लिए नहीं थी, इसलिए भगवान शिव और पार्वती इस दुर्गम गुफा में गए। रास्ते में भगवान शिव ने अपने वाहन नंदी को पहलगाम में छोड़ दिया। चंदनवारी में उन्होंने चंद्रमा को छोड़ा, जो उनके बालों में रहते हैं। शेषनाग झील के तट पर उन्होंने अपने सांपों को छोड़ दिया। ये सभी स्थान आज अमरनाथ यात्रा के पड़ाव हैं।ये भी पढे़ं- Vir Das: ₹50,000 देने के बाद भी पत्नी को नहीं मिली व्हीलचेयर, Air India पर भड़के कॉमेडियन वीर दासयह मंदिर चूना पत्थर और जिप्सम से बनी 40 मीटर ऊंची प्राकृतिक गुफा है, जो साल के अधिकांश समय बर्फ से ढकी रहती है। गुफा के अंदर बर्फ से बना एक स्वयंभू (स्वयं निर्मित) शिवलिंग है। ऐसा कहा जाता है कि यह गुफा की छत से फर्श पर टपकने वाली पानी की बूंदों के जमने से बना है। माना जाता है कि बर्फ का लिंग भगवान शिव, उनकी अमरता और समय पर विजय पाने की उनकी शक्ति का प्रतीक है।