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Stock Markets: सेंसेक्स में 700 अंकों की रिकवरी, ट्रंप के टैरिफ के बावजूद शेयर बाजार ने की वापसी, जानें 4 अहम कारण – stock market recovers after initial trump tariffs shake sensex rises 700 points from low here are 4 key reasons

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Stock Markets: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ऐलानों के बाद भारतीय शेयर बाजार में आज 3 अप्रैल को भारी गिरावट की आशंकाएं जताई जा रही थी। लेकिन सेंसेक्स और निफ्टी ने गुरुवार को जोरदार वापसी करते हुए इन सभी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार के दौरान एक समय 900 अंकों तक नीचे गिर गया था। लेकिन फिर इसमें निचले स्तर से 700 अंकों की तेज उछाल आई। निफ्टी भी 160.7 अंकों की छलांग लगाकर कारोबार के दौरान 23,306.50 के स्तर तक पहुंच गया। इसके चलते बाजार को सुबह के कारोबार में हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई करने में मदद मिली।हालांकि दोपहर 12 बजे तक, सेंसेक्स और निफ्टी अभी भी लाल निशान में बने हुए थे। वहीं स्मॉलकैप शेयरों की चाल इनसे उलट रही और बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार कर रहा था।बाजार में शुरुआती गिरावट ट्रंप के टैरिफ ऐलानों के कारण आई थी। हालांकि, फार्मा शेयरों में तेजी, क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट और भारत पर उम्मीद से कम टैरिफ के कारण निवेशकों ने दोबारा खरीदारी शुरू कर दी की, जिससे बाजार ने जबरदस्त रिकवरी दिखाई।संबंधित खबरेंआइए जानते हैं शेयर बाजार में इस जोरदार वापसी के पीछे 4 बड़े कारण क्या रहे-1. अमेरिकी टैरिफ से फार्मा सेक्टर को मिली छूटअमेरिकी सरकार ने भारत से आयात होने वाले फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स को रेसिप्रोकल टैरिफ के दायरे से फिलहाल के लिए बाहर रखने का फैसला किया है। इस फैसले से भारतीय फार्मा सेक्टर को राहत मिली, जिनकी अमेरिकी बाजार में काफी मजबूत हिस्सेदारी है। इस खबर के बाद निफ्टी फार्मा इंडेक्स कारोबार के दौरान 4% से ज्यादा चढ़ गया। ग्लैंड फार्मा, अरबिंदो फार्मा और डॉ. रेड्डी लैब्स जैसी कंपनियों के शेयरों में 10% तक की तेजी देखने को मिली।राइट रिसर्च PMS की फाउंडर और फंड मैनेजर सोनम श्रीवास्तव ने रॉयटर्स को बताया, “अमेरिकी बाजार में भारतीय फार्मा कंपनियों का काफी बड़ा निवेश है और यह छूट उनके लिए काफी बड़ी राहत है।” वहीं जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के वीके विजयकुमार ने कहा कि ग्लोबल जेनरिक ड्रग मार्केट में भारत कंपनियों की काफी मजबूत उपस्थिति है। उन्होंने कहा, “अमेरिका की यह छूट बताती है कि भारतीय कंपनियों की सस्ती दवाएं उनके लिए कितनी जरूरी हैं। इससे फार्मा स्टॉक्स में और खरीदारी देखने को मिल सकती है।”इसके अलावा, अमेरिका ने चीन, वियतनाम और बांग्लादेश पर भी ऊंचा टैरिफ लगाया है। इसके चलते भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को इनपर बढ़त पाने का मौका मिल सकता है। HDFC सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड, देवर्ष वकील ने रॉयटर्स को बताया, “नवीनतम टैरिफ चीन और वियतनाम की तुलना में भारतीय निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं, जिनकी बाजार हिस्सेदारी क्रमशः 21 प्रतिशत और 19 प्रतिशत है, जबकि भारत की 6 प्रतिशत है।”नवीनतम टैरिफ चीन और वियतनाम की तुलना में भारतीय निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं, जिनकी बाजार हिस्सेदारी क्रमशः 21 प्रतिशत और 19 प्रतिशत है, जबकि भारत की 6 प्रतिशत है।”2. भारत पर पड़ोसी देशों के मुकाबले कम टैरिफअमेरिका ने भारत पर 26% रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया है। लेकिन चीन और बाकी एशियाई देशों की तुलना में यह काफी कम है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे भारतीय कंपनियों को एक्सपोर्ट्स में लाभ मिल सकता है।अमेरिकी ने चीन पर कुल 54 प्रतिशत (इसमें से 20% टैरिफ का ऐलान पहले ही हो चुका था) लगाने का फैसला किया है। वहीं वियतनाम पर 46 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत, थाईलैंड पर 36 प्रतिशत और ताइवान पर 32 प्रतिशत का ऊंचा टैरिफ लगाया गया है।ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने कहा, “अमेरिका ने भारत के पड़ोसी देशों पर तुलनात्मक रुप से ऊंचा टैरिफ लगाया है। यह भारत के लिए एक मौका है कि वह ग्लोबल व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग में अपनी स्थिति मजबूत करे।”क्वांटेस रिसर्च के सीईओ कार्तिक जोनागडला ने कहा, “भारत की नई टैरिफ दर अभी भी चीन (34%), वियतनाम (46%) और बांग्लादेश (37%) सहित उसके प्रतिद्वंदी देशों के मुकाबले कम है। इससे भारतीय एक्सपोर्टरों को फायदा हो सकता है।” उन्होंने कहा कि नए टैरिफ ऐलानों से भारत की जीडीपी में केवल 0.1 प्रतिशत का असर पड़ने का अनुमान है और भारतीय इकोनॉमी में ऐसे बदलवों को पचाने की पर्याप्त क्षमता है।3. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावटक्रूड ऑयल की कीमतों में 3% तक की गिरावट भी भारतीय बाजार की रिकवरी का एक बड़ा कारण बनी। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 2.63% गिरकर 72.98 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2.76% गिरकर 69.73 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है। तेल की कीमतों में गिरावट से देश का आयात बिल घटता है, महंगाई पर नियंत्रण रहता है और आर्थिक संतुलन बना रहता है।4. रुपया मजबूत हुआभारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.62 पर कारोबार कर रहा था। यह दिन के 85.78 के शुरुआती स्तर से थोड़ा मजबूत था। निवेशकों ने ट्रंप के आक्रामक टैरिफ उपायों के बाद जापानी येन और स्विस फ्रैंक जैसी सुरक्षित-एसेट्स की ओर रुख किया। इससे अमेरिकी डॉलर में अस्थिरता आई, जिससे रुपये को सपोर्ट मिला।यह भी पढ़ें- Trump Reciprocal Tariff: ट्रंप ने अपने ही पैर पर मारी कुल्हाड़ी, बड़े संकट में फंस सकती है अमेरिकी इकोनॉमीडिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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